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International Tiger Day 2021: जानिए क्यूं जरूरी है शेरो का महत्व

 शेरों  के विलुप्त होने का मुख्य कारण उनका शिकार करके उसके अंगों का व्यापार करना है जिससे शेरों की संख्या में बहुत तेजी से कमी  हो रही है और इनके अस्तित्व तक का संकट खड़ा हो गया है।

 



 अकसर हम धरती को बचाने की बात करते हैं तो उसमें पर्यावरण और जंगलों की देखभाल करने की बात तो करते हैं लेकिन दुनिया में विलुप्त होती जीवों की प्रजातियों पर उतना ध्यान नहीं देते।  हमें पर्यावरण के साथ साथ जीवों को बचाने के लिए भी कोई ठोस विचार लाना चाहिए।  बाघ यानि शेरों को बचाने के मुहिम पर भी  ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। क्यूंकी समय के साथ ये जीव भी विलुप्त होने की कगार पर है। अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस (International Tiger Day 2021) पर हम यह जानेंगे कि आखिर बाघ को इतना महत्व क्यों दिया जाता है जो 29 जुलाई को पूरी दुनिया मना रही है।


International Tiger Day 2021

इस धरती पर मानव जाति की संख्या बढ़ने से हालात बहुत बदल गए है। इंसान जंगलों को नष्ट कर रहा है जो की कई सारे जीवों के घर है और अपनी क्षमता अनुसार उस पर अपना आशियाना बना रहा है। साथ ही अपने शौक पूरे करने के लिए वह जानवरों का गलत इस्तेमाल कर रहा है। जैसे जानवरों की खाल , दांत , सींग, नाखून आदि का व्यापार करना या फिर शिकार के शौक के लिए उनको मारना। इसी शौक के काऱण कई सारे जानवर आज विलुप्त होने की कगार पर है। इन्हीं जानवरों में से एक है शेर जो कभी इंसानो के लिए एक आम जानवर हुआ करता था लेकिन आज हालात एसे हैं की वह भी खत्म होने की कगार पर है और सरकार इन्हें बचाने के लिए मुहिम चला रही है। 29 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस (International Tiger Day 2021) मनाने का मुख्य कारण लोगो को पर्यावरण के प्रति सचेत करना और उन्हें जागरुक करना है जिससे लोग यह समझ सकें कि शेरों को बचाना हमारे जंगलों को बचाने के लिए कितना जरूरी है। 


शेरों  के विलुप्त होने के कारण

शेरों  के विलुप्त होने का मुख्य कारण उनका शिकार करके उसके अंगों का व्यापार करना है जिससे शेरों की संख्या में बहुत तेजी से कमी  हो रही है और इनके अस्तित्व तक का संकट खड़ा हो गया है। मानवीय गतिविधियों के कारण शेरों का आवासीय इलाका तक कम हो गया। हालात इतने खराब है की अब शेरों को बचाने के लिए अभियान चलाने पड़ रहे हैं। और इनके संरक्षण के लिए दुनिया 29 जुलाई को इंटरनेशनल टाइगर डे मना रही है।  

 

 

29 जुलाई का महत्व
29 जुलाई की तारीख खास महत्व इसलिए रखती है क्युंकी इस दिन दुनिया के बहुत सारे देशों ने साल 2010 में रूस में हुई सेंट पीटर्सबर्ग टाइगर शिखर सम्मेलन में एक समझौता किया था। इस समझौते के तहत ये देश  शेरों की घटती जनसंख्या के प्रति जागरुकता फैलाने और उनके प्राकृतिक आवास को बचाने के लिए प्रयास करेंगे। इन देशों के प्रतिनिधियों ने यह ऐलान भी किया कि जिन देशों में बाघ ज्यादा हैं वहां उनकी जनसंख्या 2022 तक दोगुनी करने का प्रयास किया जाएगा। 


 

शेरों का खत्म होना होगा खतरनाक
धरती में शेरों का कम होना वास्तव में बहुत चिंताजनक है क्योंकि इनके खत्म होने से हमारे जंगलों की पारिस्थितियां काफी बिगड़ जाएंगी और प्रकृति के संतुलन की पूरी तरह से खराब होने की नौबत आ जाएगी। इससे उन जानवरों की संख्या तेजी से बढ़ेगी जिन्हें शेर अमना भोजन बनाते हैं। ऐसे में जंगलों घास आदि वनस्पति की कमी हो जाएगी क्योंकि उन्हें खाने वाले जानवर बढ़ जाएंगे। इतना ही नहीं सांप, चूहे खाने वाले जानवर जिन्हें शेर खाते हैं बढ़ जाएंगे। ऐसे में सांप चूहे बढ़ने से पूरा संतुलन बिगड़ा जाएगा।