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क्या आत्महत्या करना ही परेशानी का समाधान है?

 आत्महत्या को अपना रास्ता चुनने वाला व्यक्ति हर पल मौत और जिंदगी के बारे में सोचता रहता है। उसकी मनोदशा रोज जीवन और मृत्यु की दुविधा में झूलती रहती है।




 भारत जैसे लोकतांत्रिक देश जहां हर व्यक्ति को पर्याप्त अधिकार मिले हुए है और एसे देश में आए दिन आत्महत्या के मामलो में वृद्धि होना एक बहुत बड़ी चिंता का विषय है। आत्महत्या की रोकथाम एक बड़ी चुनौती बन गई है। हर साल अलग-अलग उम्र वर्ग के लोगों द्वारा उठाया जाने वाला यह कदम दुनियाभर में होने वाली मौत की टॉप 20 वजहों में से एक है। इस मामले में भारत भी पीछे नहीं है।  2015 में WHO की एक रिपोर्ट के अनुसार आत्महत्या के मामलों में भारत 25वें नंबर है जो की शर्म वाली बात है। तमाम वजहों से बढ़ रहे आत्महत्या के मामलो को रोकने की जरूरत है।

आए दिन हम सभी ऐसी खबरें पढ़ते-देखते रहते हैं जिसमें आत्महत्या के कई मामले आते है जैसे किसी परेशानी से तंग होकर परिवार के किसी सदस्य ने आतमहत्या की या फिर पूरे ही परिवार के सदस्यों ने सामूहिक रूप से आत्महत्या कर ली या इसका प्रयास किया। भारत में आत्महत्या के मामले में कोई भी वर्ग पीछे नही है। अमीर हो या गरीब, विद्यार्थी हो या भूखे पेट सोने वाला बच्चा और बॉलीवुड का चमकता सितारा या फिर एक सामान्य सी जिंदगी जीने वाला व्यक्ति। 

 

आत्महत्या करने के कारण

आत्महत्या करने के मुख्य कारण सामाजिक, आर्थिक व मेडिकल होते है - सामाजिक कारणों में सबसे अहम रिलेशनशिप है जिसमें अफेयर, एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर और शादीशुदा जिंदगी से संबंधित वजहें होती हैं। इसके अलावा, परिवार, मित्रों या फिर जान पहचान वालों के साथ आने वाली दिक्कतों के चलते भी लोग यह कदम उठाते हैं। - आर्थिक कारणों में बिजनेस का डूबना, नौकरी छूटना, आय का साधन न होना, कर्ज होना जैसी चीजें शामिल हैं। - मेडिकल कारणों में लाइलाज शारीरिक व मानसिक बीमारी, गहरा डिप्रेशन और बुढ़ापा जैसी कई सारी वजहें होती हैं। 







 क्या आत्महत्या करना ही परेशानी का समाधान है?

 आत्महत्या कभी भी परेशानियों का समाधान नहीं रहा है क्योंकी मरने वाला व्यक्ति अपने पीछे एक  रोता हुआ परिवार और अपने सपनो को छोड़कर जाता है। आत्महत्या करने से कभी भी दुख खत्म नहीं होता बल्की ये मरने वाले के परिवार और उसके चाहने वाले को आजीवन सहने वाला एक दर्द देकर जाता है जो हमेशा कांटे की तरह उन्हें चुभता है। अगर आत्महत्या ही सभी परेशानियों का समाधान होता तो कोई भी व्यक्ति जिंदगी में सफल नहीं होता और हम एक एसे समाज में जी रहे होते जहां मेहनत और मानसिक रोग के इलाज के लिए कोई जगह नही होती और व्यक्ति समाधान पर विचार ना करके समस्या के बारे में ही सोचता रहता।

 

समाधान

आत्महत्या को अपना रास्ता चुनने वाला व्यक्ति हर पल मौत और जिंदगी के बारे में सोचता रहता है। उसकी मनोदशा रोज जीवन और मृत्यु की दुविधा में झूलती रहती है। वह दिल से तो जीना चाहता है, लेकिन उसे अपनी तकलीफों का अंत और समाधान सिर्फ आत्महत्या को अपनाने में ही दिखता है। इस कारण वह गलत निर्णय लेता है और नई तकलीफों को अंजाम देता है । ऐसे में परिजन यदि उसकी तकलीफों को पहले से ही समझ लें और उसकी सहायता करें तो व्यक्ति सहज रूप से जीवन जीना स्वीकार कर लेता है। जब व्यक्ति असामान्य व हताश महसूस करे तो उसे तब तक अकेला न छोड़ें, जब तक मनोचिकित्सक की सुविधा उपलब्ध न हो जाए। आपका यह छोटा सा सहयोग एक जीवन को बचा सकता है। क्योंकि परेशानियों का समाधान तो निकल सकता है लेकिन आत्महत्या का नहीं ।